हिन्दुधर्म और अन्य मजहबों के निर्माण की कहानी

हिन्दुधर्म और अन्य मजहबों के निर्माण की कहानी

प्राचीन काल में दुनिया में वैदिक संस्कृति और धर्म प्रचलित था.

दुनिया जब उत्पन्न हुई तो उसके साथ वेद भी उत्पन्न हुए. दुनिया के सभी मत, संप्रदाय वेदों को दुनिया का पहला ग्रन्थ/कीताब मानते है.

वेदकाल में सभी लोगों को मानव कहा जाता था.

ब्रह्म को माननेवाले ब्राह्मण, विष्णु को माननेवाले वैष्णव और शिव को माननेवाले शैव. इसतरह संप्रदाय उत्पन्न हुए.

भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ.

रामायण लिखी गयी.

भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण हुआ. उन्होंने भगवद्गीता कही.

महाभारत हुआ. महाभारत लिखी गयी.

भगवान महावीर का अवतरण हुआ.

इससे जैनधर्म उत्पन्न हुआ. त्रिपिटक लिखी गयी.

भगवान बुद्ध का अवतरण हुआ.

इससे बौद्धधर्म उत्पन्न हुआ. अंगुत्तर निकाय, मग्झिम निकाय लिखी गयी.

बौधधर्म ने आर्यसत्य और आर्यअष्टांगिक मार्ग बताए. तब मानवों को आर्य अर्थात श्रेष्ट कहा जाने लगा.

जब भारत ने सर्वत्र अनीश्वरवाद फैला तो. हिन्दू शब्द उत्पन्न हुआ. हिन्दू यह वेदों के इन्दु शब्द का विग्रह है जिसका अर्थ है. सत्य अर्थात ईश्वर को माननेवाला अर्थात ईश्वरवादी. हिन्दू तत्व है- ईश्वर एक है, किन्तु ईश्वर को अनेक्नाम से पुकारा जाता है. इसलिए हिंदुओं में ईश्वर एक है इस भावना के साथ ईश्वर को अनेकनाम और रुप में पूजते/उपासते है.

विदेशो में-

वेदों के समय कुछ लोग अग्निपूजक लोग थे. उनके परम्परा में पारसी मजहब उत्पन्न हुआ. आज भी पारसियों को अग्निपूजक कहा जाता है. लेकिन कुछ पारसी अपनेआप को अग्निपूजक नहीं मानते. अग्नि उनके लिए ज्ञान का प्रतिक है. पारसियों ने एक नयी विचारधारा विकसित की- देवता और सैतान की. उनके देवता का नाम है अहुरमज्द.

एक पारसी अबराम ने निराकार की उपासना करने के लिए एक मजहब बनाया. वह यहूदी मजहब है. यहूदी लोग अहुर देवता को हिब्रू भाषा में (यहुर…) याहवे कहते है. इस परम्परा में मोजेस ने तौराह लिखी और यहूदियों को मजहब के आधारपर एक विशिष्ट विचारधारा दी जिससे उन्होंने इस्रायल की स्थापना की.

लेकिन इस्रायल पर रोमन लोगो ने आक्रमण किया. उसपर कब्ज़ा किया. यहूदियों में एक विश्वास था कि कोई मसीहा आयेगा और वह इस्रायल की स्थापना करेगा और इस्रायल में फिर से राजा डेविड का राज्य स्थापन करेगा.

जीसस एक यहूदी क्रांतिकारी था. उसने रोमन साम्राज्य को हटाने के लिए और इस्रायल की फिर से स्थापना करने के लिय अपने को मसीहा घोषित किया. लेकिन वह इस्रायल की स्थापना नहीं कर सका. इसीकारण यहूदी जीसस को मसीहा मानने से इंकार करते है. इसलिए जीसस के लोग ग्रीक में स्थानांतरित हुए. उन्होंने मसीहा को ग्रीक भाषा में ख्रीस्त कहाँ शुरू किया. और ख्रिश्चन मजहब स्थापित हुआ. बाइबल लिखी गयी. वे उनके देवता याहवे को यहोवा कहने लगे. ग्रीक राजा कानस्टाटाईन एक कानून पास किया जिसने जीसस को देवता घाषित किया. तब से वे जीसस को देवता मानते है.

इस्रायल की स्थापना होने के बाद यहूदियों ने उनके एक इश्मायली कबीले को इस्रायल के बेदखल किया. वह कबीला अरबस्थान में स्थानांतरित हुआ. उन्होंने अरबी भाषा अपनायी. जब अरबी लोग इस कबीले में शामिल हुए, उनकी संख्या बढ़ी तो उन्होंने इसका पूरी तरह से अरबीकरण किया. वे इस्मायली कबीले को अरबी में इस्लाम कहने लगे. इसतरह इस्लाम उत्पन्न हुआ. उन्होंने अरबी कीताब कुरआन लिखी.

भारत में फिर से निराकार की उपासना के लिए गुरु नानक ने प्रयास किये. सीखधर्म उत्पन्न हुआ. गुरुवाणी लिखी गयी.

आज भारत में ये सभी धर्म और मजहब है. इसलिए भारत को धर्मभूमि कहा जाता है.

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