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राष्ट्र और राज्य का अन्तर क्या है?

राज्य भूभाग/जमीन से बनता है. नक्शा बनाकर राज्य दिखाया जा सकता है.

राष्ट्र यह मानवों की भावनात्मक तथा सांस्कृतिक एकात्मता से बनता है.  समूह की एकता ही राष्ट्र है. नक्शा बनाकर राष्ट्र को दिखाया नहीं जा सकता.

हिन्दुराष्ट्र का अर्थ है सभी हिंदुओं की एकात्मता.

आज हिंदुओं में एकता नहीं है. सभी लोग अलग अलग दिशाओं में सोचते है. इतना ही नहीं तो दस में से दो हिन्दू ऐसे होते है जो हिंदुओं के खिलाफ बोलते है, हिन्दुविरोधी कार्य करते है. इसलिए कुछ लोग कहते है कि  हिन्दुराष्ट्र नहीं बन सकता.

हिंदुओं में अनेक जातिया है, अनेक भाषा है, अनेक पंथ, संप्रदाय है. क्या इसलिए हिंदुओं में एकता नहीं है?  नहीं. जो कथित संगठित मजहब है उनमे भी कई बिरादरिया, फिरके, कबीले, जातिया है, उनमे भी अनेक भाषाए है, उनमे भी अनेक मतभेद है, संप्रदाय है, गुट है.

हिंदुओं की एकता न होने का प्रमुख कारण है हिंदुधर्म के लिए कार्य करनेवाला समूह नहीं है. और दूसरा कारण है हिंदुओं को राजकीय दृष्टिकोण नहीं है.

आज जितने भी हिन्दुधर्म के साधुसंत, सन्यासी है, वे सभी अपने अपने संप्रदाय या पंथ के लिए कार्य करते हुए दिखाई देते है. वे समस्त हिंदुओं को ध्यान में रखकर कार्य नहीं कर रहे है.

हिन्दुधर्म एक धर्म है. इस धर्म का एक ईश्वर है, एक परमात्मा है. उस परमात्मा को सभी हिन्दू अलग अलग नाम से पुकारते है. विविध रुप में पूजते है. वह निराकार है और साकार भी है. मात्र वह एक है. उसका यह समाज भी एक है. समस्त हिन्दू एक है. इसको ध्यान में रखके सभी हिंदुओं में सामयिकता लाने का प्रयास अखिल भारतीय स्तर पर होना चाहिए. हिन्दुधर्म का सम्यक मार्गदर्शन हिंदुओं को करना आवश्यक है. इससे हिंदुओं में भावनिक एकात्मता स्थापित होगी. अभी कुछ साधू-सन्यासी तथा धर्मगुरु यह प्रयास कर रहे है. शुरुवात हो चुकी है. यह अच्छी बात है.

यह भावनात्मक एकात्मता आएगी तभी हिंदुओं में सामाजिक समरसता भी आएगी, एकता स्थापित होगी. यह एकात्मता ही हिन्दुराष्ट है. कुछ थोड़े हिन्दू ऐसे भी होंगे जो इस एकात्मता से अपनेआप को दूर रखेंगे. ऐसे लोगों को नजरअंदाज करना बेहतर है. हिन्दुराष्ट्र का निरंतर कार्य करते रहना आवश्यक है.

भारत देश को हिन्दुराष्ट्र की आवश्यकता है, हिन्दुराज्य की नहीं. इसका अर्थ यह है की भारत में हिंदुओं की एकात्मता को अनुकूल सरकार चाहिए, हिन्दुहित का कार्य करनेवाली सरकार चाहिए. ग्रंथो पर आधारित सरकार नहीं.

हिन्दुराष्ट्र अर्थात हिंदुओं की अटूट भावनिक एकात्मता, सभी हिन्दू एक है की भावना.

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